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International Tiger Day 2020: कब और कैसे हुई शुरुआत इस दिन



International Tiger Day 2020: कब और कैसे हुई शुरुआत इस दिन

International Tiger Day एक ऐसा दिन है जो के दुनिया भर में बैठे लोगों के दिलों में जागरूकता भरता है. आज के दिन में दुनिया भर में बागों की संख्या बुहत ज्यादा कम हो गयी. आंकड़े इस बात उलेखन करते है 1915 में बाघों की संख्या एक लाख से ज्यादा थी। इस तरह धीरे धीरे संख्या घटती गयी. इस बारे में संदेह दिखते होये 1973 में इंद्रा गाँधी ने 'प्रोजेक्ट टाइगर' लांच किया, इस संदर्भ में कल राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर हमला बोलते होये ट्वीट करा "यह काफी बड़ा और सफल प्रोजेक्ट रहा, लेकिन कई खतरों का सामना भी किया था. जब हम बाघ की रक्षा करते हैं तो हम पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) की रक्षा करते हैं.''

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  • कब हुई टाइगर-डे की शुरुआत, विश्‍व में कितनी प्रजातियां हैं मौजूद- बागों की संख्या कम होना बुहत ही चिंतित विषा बना हुआ था, इस लिया जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 29 जुलाई को International Tiger Day मनया जाता है. 2014 में हुई गणना के अनुसार भारत में 2226 बाग पाये गए है. जो की 2010 की गणना से आदिक मात्रा में है. 2010 में संख्या 1706 थी, नये आंकड़ों के मुताबिक संख्या 2967 पहुंच गई है. देहली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर ऑल इंडिया टाइगर 2018 जारी किया। इस तरह संख्या में ७४१ की बढ़ोतरी पायी गयी थी.


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  • कैसे हुई शुरुआत इस दिन- बागों की संख्या की कमी को पूरा करने लिए और लोगों में इस चीज़ का प्रचार और जागरूकता लाने के लिए 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने की घोषणा हुई थी। उस समय सम्मेलन में मजूद सभी देशों की सरकारों ने तेह किया था के 2022 तक बागों की संख्या को दुगना किया जायेगा।

  • अब तक बागों की आबादी- डब्ल्यूडब्ल्यूएफ(WWUF)के अनुसार दुनिया में सिर्फ 3900 बाग ही बचे है. 20वी सदी की शुरुआत से 95 फीसदी बागों की संख्या मैं कमी पायी गयी है.

  • बागों की घटती आबादी का कारण- इस के पीछे के कई कारन पाए गए है, वनों में लगातार कटाव, चमड़े, हड्डियों एवं शरीर के अन्य भागों के लिए गलत शिकार, जलवायु और वातवरण में दुषितपन

  • बाघों की प्रजातियां: साइबेरियन टाइगर, बंगाल टाइगर, इंडोचाइनीज टाइगर, मलायन टाइगर, सुमात्रन टाइगर ये सारी प्रजातियां अब भी किसी किसी स्थान में पायी जाती है. बाली टाइगर, कैस्पियन टाइगर, जावन टाइगर ये वो प्रजातियां है जो पूरी तरह से गायब हो चुकी है.

  • प्रोजेक्ट टाइगर का उद्देश्य- 1973 में इंद्रा गाँधी के दुवारा शुरू हुआ प्रोजेक्ट टाइगर भारत में उपलब्ध बाघों की संख्या के वैज्ञानिक, आर्थिक,और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण सुनिश्चित करना है।


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